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सार्थकता तब होती जब मूलवासी सदानों की भारी संख्या में भागीदारी होती: राजेन्द्र प्रसाद

जयपाल सिंह मुंडा से जेएमएम सहित अन्य सभी दलों को सीखने की जरूरत

भेदभाव की नीति ने झारखण्ड को बर्बाद कर दिया

रांचीlसदानों की ताकत को जयपाल सिंह मुंडा जानते थे मूलवासी सदानों का साथ मिले बिना, झारखण्ड राज्य बनना सम्भव नहीं हैlइसलिए मूलवासी सदानों को जोड़ने के लिए जयपाल सिंह मुंडा ने आदिवासी महासभा को 1950 में भंग कर झारखण्ड पार्टी का गठन किया था । इसके बाद जयपाल सिंह मुंडा ,को मूलवासी सदानों का समर्थन मिला और झारखंड पार्टी के गठन के बाद विधानसभा की पहली चुनाव में झारखण्ड पार्टी को 35 विधानसभा की सीट मिली थी। उक्त बातें झारखण्ड आंदोलनकारी सह मूलवासी सदान मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद ने कही।
झामुमो के द्वारा ध्रुवा के प्रभात तारा मैदान में उलगुलान महारैली को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि महारैली में एक वर्ग की भीड़ जुटाने से जेएमएम को बहुत फैयदा नहीं मिलेगा।उन्होंने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा से जेएमएम सहित सभी दलों को सीखने कि जरूरत है।
उन्होंने कहा कि झारखण्ड के मूलवासी सदानों को भी उन्हें जोड़ना पड़ेगा तब जाकर झामुमो को इसका लाभ मिल सकता है। राजेन्द्र प्रसाद ने कहा मूलवासी सदान मोर्चा एक समाजिक संगठन है इस संगठन के माध्यम से हम झारखण्ड राज्य के हित में सभी दलों को अपनी सलाह देते रहे हैं।
श्री प्रसाद ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वास्तव में व्यवहार कुशल व्यक्ति हैं और वे सभी का सम्मान करते हैं । लेकिन सिर्फ सम्मान देने से किसी का पेट नहीं भर जाता है, उन्हें मूलवासी सदानों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास करना चाहिए था और राजनीति भागीदारी के साथ-साथ सदानों के हितों में भी काम करना चाहिए था। लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं कर पाए। प्रसाद ने कहा कि जब तक 65 प्रतिशत मूलवासी सदानों का राजनीतिक दलों को समर्थन प्राप्त नहीं होगा तब-तक खंडित जनादेश ही राजनीतिक दलों को मिलता रहेगा। राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि यह मूलवासी सदान में विभिन्न जातियां हैं,उस पर क्षेत्रीय दल कभी भरोसा नहीं जताया। जिसका फायदा राष्ट्रीय दल उठाते रहे हैं।

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