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JMM नेता और पूर्व मंत्री साइमन मरांडी नहीं रहे 

झामुमो के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री सह पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष साइमन मरांडी का सोमवार की देर रात निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। तबीयत ज्‍यादा बिगड़ने पर उन्हें कोलकाता के आरएन टैगोर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उनका इलाज चल रहा था। सोमवार देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनके निधन से झामुमो समेत झारखंड की राजनीतिक जगत में शोक की लहर है। साइमन मरांडी गुरु जी शिबू सोरेन के काफी करीबी माने जाते हैं। उनके निधन पर सीएम हेमंत सोरेन, जेएमएम सुप्रीमो शिबू सोरेन समेत कई नेताओं ने शोक जताया है।

आजादी के बाद से अब तक लिट्टीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र में केवल छह चेहरे ही विधायक चुने गए। 1977 से यह सीट लगातार झामुमो के कब्जे में रही। झामुमो के साइमन मरांडी ने पांच बार और उनकी पत्नी सुशीला हांसदा ने चार बार इस क्षेत्र का बतौर विधायक प्रतिनिधित्व किया है। यानी पति-पत्नी ने 40 सालों तक इस सीट पर अपना एकतरफा वर्चस्व कायम रखा। छात्र जीवन से राजनीति की शुरुअात करने वाले साइमन ने पहली बार 1977 में बतौर निर्दलीय मरांग मुर्मू को 149 मतों से हराया था। बाद में उन्होंने शिबू सोरेन के साथ मिलकर झामुमो बनाया। 1989 में लोकसभा में चले जाने के कारण साइमन ने यह सीट अपनी पत्नी सुशीला हांसदा को सौंप दिया। सुशीला इस सीट पर 1990 से 2005 तक लगातार विधायक रहीं। इससे पूर्व इस सीट से रामचरण किस्कू ने तीन बार, सोम मुर्मू दो बार, बी मुर्मू व डाॅ. अनिल मुर्मू ने एक-एक बार प्रतिनिधित्व किया है।

2014 में बेटे को टिकट नहीं मिलने पर झामुमो के बागी हुए थे साइमन

साइमन 2014 विस चुनाव को छोड़ कभी नहीं हारे। 2014 के लोकसभा चुनाव में पुत्र दिनेश को टिकट नहीं मिलने से वे बागी हो गए थे और झामुमो छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था। इसी चुनाव में झामुमो के डाॅ. अनिल मुर्मू ने साइमन को शिकस्त दी थी। इस सीट पर सबसे अधिक मतों से जीतने का रिकाॅर्ड भी अनिल मुर्मू के नाम ही है। 2019 में मरांडी के पुत्र दिनेश को झामुमो ने टिकट दिया। और मरांडी फिर पार्टी से जुड़े। पुत्र की जीत में अहम भूमिका निभाई।

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