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सरकारी योजनाओं के तहत बने भवन की हाल बेहाल

20 लाख की लागत से बनने वाला नाला का दुग्ध शीतक केंद्र बदहाल, मशीनो मैं लग रही जंग

अनवर हुसैन

जामताड़ा। सरकारी पैसों की बर्बादी कैसे होती है। इसका इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है। सत्ता में आते ही कुछ मंत्री इंसफ़राट्रक्टर की सुविधा देखे बिना ही विकास की सौचने लगते हैं।नतीजा जितनी राशि विकास मद में खर्च होती है, वो सिर्फ बर्बाद ही होती है। ऐसा ही कुछ नाला विस क्षेत्र में हुआ है । विकास की सौच लेकर एक अच्छी पहल की शुरुवात की गई थी।लेकिन बुनियादी सुविधा को देखे बिना ही काम शुरू किया गया। नतीजा सरकार की सारी राशि बेकार गई। एक पैसे का लाभ जनता को नही मिला।

तत्कालीन कृषि मंत्री सत्यानंद झा ने दुग्ध शीतक केंद्र बनाया था

बता दें कि नाला के पातुलिया मोड़ पर नाला विस के पूर्व विधायक सह तत्कालीन कृषि मंत्री सत्यानंद झा ने दुग्ध शीतक केंद्र बनाया था। उन्होंने नाला विस क्षेत्र में यादव बहुल समाज को देखते हुए ही दुग्ध शीतक केंद्र की शुरुवात की। लेकिन दुख की बात है कि 20 लाख की राशि खर्च होने के बाद भी लोगों को कोई लाभ नही मिला। सिर्फ सरकारी राशि की खर्च हुई। भवने बनी। दुग्ध शीतक केंद्र में लाखों की बड़ी-बड़ी मशीनें लगाई गई। लेकिन सभी बेकार हो गए। आज भवन के दरवाजे, खिड़की, मशीनें बर्बाद होने लगे हैं।

 

बुनियादी सुविधा को सौचे बिना ही लगाई गई प्लांट

बता दें कि दुग्ध शीतक केंद्र अच्छे उद्देश्य से खोला गया था। लेकिन बुनियादी सुविधा पर ध्यान नही दिया गया, जिस कारण आज नाला का ये दुग्ध शीतक केंद्र चालू नही हो पाया। जनता के पैसों की बर्बादी छोड़ कोई दूसरा लाभ नही हुआ। मिल्क रुट को ध्यान नही दिया गया। देवघर के सारठ मिल्क रुट को सौच कर ही इस दुग्ध शीतक केंद्र को बनाया गया था। लेकिन झारखंड मिल्क फेडरेशन कंपनी ने नाला, जामताड़ा को कभी मिल्क रुट में शामिल नही किया था। मिल्क रुट की पहले व्यवस्था कर ही इसे बनाया जाता तो यह दुग्ध शीतक केंद्र सफल होता।

दुग्ध शीतक केंद्र खुलने से हजारों लोगों को मिलता रोजगार

यदि नाला की ये दुग्ध शीतक केंद्र चालू होता तो क्षेत्र के हजारों लोगों को रोजगार मिलता। दुग्ध उत्पादकों को दूध का उचित मूल्य भी मिलता। बता दें की नाला क्षेत्र में यादव समाज की बहुलता है। बड़े पैमाने पर दूध का उत्पादन होता है। लेकिन उत्पादकों को उनके दूध का उचित मूल्य नही मिलता है। वे बंगाल में दूध को ले जाकर बेंचते हैं। जिससे समय की भी बर्बादी होती है। साथ ही सही कीमत भी नही मिलता है।

इस दुग्ध शीतक केंद्र के बनने में 20 लाख की खर्च हुई

बता दें की नाला दुग्ध शीतक केंद्र के बनने में 20 लाख की राशि खर्च हुई। बड़ी-बड़ी मशीनें लगी। सभी उपकरण आज यंग लग रहे है। सत्ता में दोबारा भाजपा की सरकार बनी, फिर भी इस दुग्ध शीतक केंद्र को चालू नही किया गया। वर्तमान में दूसरी पार्टी की सरकार है। आब इनसे लोगों की उम्मीद भी नही है कि इस दुग्ध शीतक केन्द्र को चालू किया जाएगा। क्योंकि इस केंद्र को भाजपा के मंत्री ने बनाया था।

गव्य विकास के अधिकारी भी मान रहे बुनियादी सुविधा को ध्याम दिए बिना बनाया गया केंद्र

गव्य विकास के एक बड़े अधिकारी ने नाम नही छापने के शर्त पर कहा कि इसमे बेकार के पैसे खर्च किया गए हैं। जबतक मिल्क फेडरेशन वाला मिल्क रुट को हरी झंडी नही दे देते, बनाना नही चाहिए था। लेकिन सत्ता की ताकत पर जबरन कोई काम सफल नही होता है।

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