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आजसू नेता ने झारखंड इस्पात फैक्ट्री के सामने करवाया हंगामा

  • फैक्ट्री के कामगार के मौत के बाद शव को लेकर प्रदर्शन
  • मुआवजा के नाम पर फैक्ट्री प्रबंधन को ब्लैकमेल कर रहे नेता
  • झारखंड इस्पात के समक्ष आंदोलन कर रहे लोगों पर पुलिस का लाठीचार्ज

रामगढ़। नेतागण अपने निजी स्वार्थ के कारण किसी भी अवसर को गवाना नहीं चाहते हैं। ऐसा ही कुछ मामला रामगढ़ थाना क्षेत्र के हेसला स्थित झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड में देखने को मिला है। जानकारी के अनुसार प्रदेश का एक बड़ा औद्योगिक प्रतिष्ठान झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के ठेकेदार का एक कर्मचारी बुद्ध उरांव का 8 अगस्त को फैक्ट्री से वापस घर जाने के बाद तबीयत खराब हो गई। उसे लकवा जैसी शिकायत हुई। सूचना पर फैक्ट्री का ठेकेदार उस कामगार को अविलंब रांची के नामकुम स्थित ईएसआई अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन यहां ठीक होता नहीं देख कामगार को अविलंब रांची के प्रसिद्ध सैमफोर्ड अस्पताल में भर्ती कराया गया।इस अस्पताल में कामगार का ऑपरेशन किया गया। लेकिन फैक्ट्री का कामगार बुद्धू उरांव की मौत 14 अगस्त को हो गई। यह मामला आजसू नेता तिवारी महतो के पास पहुंचा। आजसू नेता तिवारी महतो मृतक कामगार को मुआवजा देने के नाम पर शव को फैक्ट्री गेट पर रखकर आंदोलन शुरू कर दिया। हालांकि इस आंदोलन में तिवारी महतो के अलावा भी कई नेता शामिल हुए। लेकिन एक्टिव रूप में तिवारी महतो ही सामने आया। फैक्ट्री के कामगार के मृत्यु के बाद उसके परिजनों को 15 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग फैक्ट्री प्रबंधन से की गई। फैक्ट्री प्रबंधन फैक्ट्री एक्ट के तहत मुआवजा देने को तैयार हुई। लेकिन आंदोलनकारी नेता उस पर तैयार नहीं हुए। स्वतंत्रता दिवस के दिन 15 अगस्त की दोपहर को आंदोलनकारी नेताओं ने मृतक कामगार के शव को फैक्ट्री गेट के सामने रखकर आंदोलन आरंभ कर दिया। शाम के समय वहां हंगामा मच गया। जिसके बाद फैक्ट्री के सारे मजदूर भाग निकले। फैक्ट्री पूरी तरह से बंद हो गया। लगातार कई घंटे तक फैक्ट्री बंद होने के बाद राजधानी से जिला पुलिस प्रशासन पर दबाव पड़ी।जिसके बाद देर शाम को पुलिसकर्मियों ने फैक्ट्री के समक्ष आंदोलन कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज किया। लेकिन इसके बावजूद आंदोलनकारी शव को रखकर फैक्ट्री के समक्ष लगातार प्रदर्शन करते रहे। इसके उपरांत 16 अगस्त को रामगढ़ की एसडीओ कृतिश्री फैक्ट्री गेट पहुंची।एसडीओ एवं पुलिस बल ने अपराहन एक बजे के लगभग प्रदर्शन कर रहे लोगों को खदेड़ दिया। वही मुआवजे के नाम पर आंदोलन कर रहे आजसु नेता तिवारी महतो ने कहा कि फैक्ट्री प्रबंधन की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी।मृतक कामगार के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए यहां आंदोलन किया गया है। पुलिस प्रशासन यहां गलत कर रहा है। आंदोलन कर रहे लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर गलत किया है।

फरवरी में तिवारी महतो पर करायी थी प्राथमिकी दर्ज

आजसू के वरिष्ठ नेता निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो पर फरवरी महीने में फैक्ट्री प्रबंधन के एक अन्य शाखा के कर्मचारी ने प्राथमिकी दर्ज कराया था। प्रबंधन के एक पदाधिकारी प्रमथ नाथ महतो ने 16 फरवरी 2020 को रामगढ़ थाना में एक प्राथमिकी दर्ज कराया था। जिसमें कहा गया है कि निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो नी कंपनी से एक हाईवा टिप्पर ट्रक को भाड़े पर चलाने के लिए वर्ष 2016 में लिया था।इसके एवज में ₹50 हजार मासिक भाड़ा तय की गई थी। तिवारी महतो से बार-बार भाड़ा का भुगतान समय पर करने के लिए कहा जाता था उन्होंने 2017 तक चेक द्वारा भुगतान दिया। परंतु आप निर्मल महतो उर्फ तिवारी माताओं द्वारा ना तो गाड़ी का भाड़ा दिया जा रहा है।वही वह गाड़ी भी वापस नहीं कर रहे हैं। प्राथमिकी में कहा गया है कि गाड़ी वापस करने या भुगतान करने की दबाव पर तिवारी महतो हमारे पंजाब नेशनल बैंक के निकट स्थित कार्यालय में आकर कंपनी के मालिक रामचंद्र रुंगटा के साथ दुर्व्यवहार किया। साथ ही कहा कि हम आपके तीनों फैक्ट्रियों को किसी ना किसी रूप में डिस्टर्ब कर के बंद करवा देंगे। उस समय तिवारी महतो ने कहा कि ना तो गाड़ी वापस करेंगे और ना तो बकाया गाड़ी का भाड़ा ही देंगे।प्राथमिकी के द्वारा मांग किया गया था कि तिवारी महतो पर कार्रवाई करते हुए कंपनी के वाहन और बकाए को दिलवाया जाए।लेकिन अफसोस की बात है कि अब तक रामगढ़ पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

फैक्ट्री बंद होने से सैकड़ों मजदूर हुए बेरोजगार

जानकारी के अनुसार प्रदेश का एक बड़ा औद्योगिक प्रतिष्ठान झारखंड इस्पात में वर्तमान समय लगभग 550 लोग काम करते हैं। फैक्ट्री प्रबंधन ने लॉकडाउन के दौरान मई तक फैक्ट्री को बंद रखा था। लेकिन कर्मचारियों के दबाव के बाद फैक्ट्री को खोला गया। वही फिर एक बार अब जब फैक्टरी धीरे-धीरे लाइन पर आने लगी थी। तब कामगार की मौत के बाद मुआवजे की मांग को लेकर फैक्ट्री को बंद करा दिया गया है।इससे फैक्ट्री में काम करने वाले 550 मजदूरों के सामने बेरोजगारी और भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी।

फैक्ट्री प्रबंधन को भारी हुआ नुकसान

जानकारी के अनुसार फैक्ट्री के कामगार के मौत के बाद फैक्ट्री को जबरन बंद कराए जाने के बाद फैक्ट्री प्रबंधन को भारी नुकसान हुआ है। जानकारी के अनुसार फैक्ट्री एकाएक बंद होने से फैक्ट्री के फर्नेस इकाई में लिक्विड मेटल पूरी तरह से जम गया है। वही स्पंज प्लांट में एकाएक काम बंद होने से मशीनरी को नुकसान हुआ है। वहीं फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि मुआवजे के नाम पर कुछ नेता ब्लैकमेल कर रहे हैं।लेकिन अब उनकी मंशा को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

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