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पांडवों का लाक्षागृह- अब मेरठ बनेगा पुरातत्व विभाग का नया सर्किल

  • पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल ने ट्वीट कर मेरठ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का नया सर्किल कार्यालय खोले जाने को लेकर घोषणा की

पिछले कई सालों से मेरठ में पुरातत्व विभाग का सर्किल बनाने की मांग चली आ रही थी। बुधवार को पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल ने ट्वीट कर मेरठ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का नया सर्किल कार्यालय खोले जाने को लेकर घोषणा की है।

कई बार पुरातात्विक महत्व के अवशेष मिल चुके हैं

बता दें कि यहां हस्तिनापुर, बिजनौर, बागपत आदि में काफी संख्या में पौराणिक स्थल मौजूद हैं। यहां से काफी संख्या में कई बार पुरातात्विक महत्व के अवशेष मिल चुके हैं। जिनके बारे में आगरा की पुरातत्व विभाग की टीम को सूचित किया गया था। वहीं दूर की वजह से रिपोर्ट आने में काफी देर हो जाती थी। इसी को देखते हुए मेरठ में नए सर्किल कार्यालय खोलने की मांग की जा रही थी।

अभी तक आगरा सर्किल के पुरातत्व विभाग के अंतर्गत ही मेरठ शामिल था

हाल ही में कुछ दिन पहले सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने भी पर्यटन मंत्री से मुलाकात की थी। उन्होंने भी हस्तिनापुर और सिसौली में पुरातात्विक अवशेष मिलने के महत्व को बताया था। अभी तक आगरा सर्किल के पुरातत्व विभाग के अंतर्गत ही मेरठ शामिल था।

पांडवों का लाक्षागृह

बरनावा हिंडनी (हिण्डन) और कृष्णा नदी के संगम पर बागपत जिले की सरधना तहसील में मेरठ (हस्तिनापुर) से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी स्थित है। यह प्राचीन गांव ‘वारणावत’ या ‘वारणावर्त’ है, जो उन 5 ग्रामों में से था जिनकी मांग पांडवों ने दुर्योधन से महाभारत युद्ध के पूर्व की थी। ये 5 गांव वर्तमान नाम अनुसार निम्न थे- पानीपत, सोनीपत, बागपत, तिलपत और वरुपत (बरनावा)।

बरनावा गांव में महाभारतकाल का लाक्षागृह टीला है। यहीं पर एक सुरंग भी है। यहां की सुरंग हिंडनी नदी के किनारे पर खुलती है। टीले के पिलर तो कुछ असामाजिक तत्वों ने तोड़ दिए और उसे वे मजार बताते थे। यहीं पर पांडव किला भी है जिसमें अनेक प्राचीन मूर्तियां देखी जा सकती हैं।

गांव के दक्षिण में लगभग 100 फुट ऊंचा और 30 एकड़ भूमि पर फैला हुआ यह टीला लाक्षागृह का अवशेष है। इस टीले के नीचे 2 सुरंगें स्थित हैं। वर्तमान में टीले के पास की भूमि पर एक गौशाला, श्रीगांधीधाम समिति, वैदिक अनुसंधान समिति तथा महानंद संस्कृत विद्यालय स्थापित है।

देहरादून के लाखामंडल में भी एक लाक्षागृह है। देहरादून से 125 किमी दूर यमुना किनारे ‌मौजूद लाखामंडल चकराता से 60 किमी दूर है। 2 फुट की खुदाई करने से ही यहां हजारों साल पुरानी कीमती मूर्तियां निकली हैं। इसी कारण इस स्‍थान को आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की निगरानी में रखा गया है।


यहां एक सुरंग भी है जिसके चलते इसके लाक्षागृह होने की अटकलें लगाई गईं। लाक्षागृह गुफा के अंदर स्थित शेषनाग के फन के नीचे प्राकृतिक शिवलिंग के ऊपर टपकता पानी यहां की खासियत है। हालांकि महाभारत के अनुसार पांडवों का लाक्षागृह वारणावत में ही था। उस काल में और भी लाक्षागृह बनाए गए होंगे।
बरनावा जाने के लिए मेरठ से शामली रोड होते हुए बरनावा जाया जा सकता है। जाने के लिए अपने वाहन या उत्तरप्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बस में सफर कर सकते हैं।

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