खिलौने मन बनाते भी हैं

 – खिलौने जहां ऐक्टिविटी को बढ़ाने वाले होते हैं, तो खिलौने हमारी आकांक्षाओं को भी उड़ान देते हैं। खिलौने केवल मन ही नहीं बहलाते, खिलौने मन बनाते भी हैं और मकसद गढ़ने वाले भी होते हैं। हमारे देश में लोकल खिलौनों की बहुत समृद्ध परंपरा रही है। कई प्रतिभाशाली और कुशल कारीगर हैं, जो अच्छे खिलौने बनाने में महारत रखते हैं। भारत के कुछ क्षेत्र खिलौनों के केन्द्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं.
ग्लोबल टॉय इंडस्ट्री 7 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक

– ग्लोबल टॉय इंडस्ट्री 7 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है। इतना बड़ा कारोबार लेकिन भारत का उसमें हिस्सा बहुत ही कम। मैं अपने स्टार्ट अप मित्रों, नए उद्यमियों से कहता हूं टीम अप फॉर टॉएज़- आइए मिलकर खिलौने बनाएं। अब सभी के लिए लोकल खिलौनों के लिए वॉकल होने का समय आ गया है.

फसल की बुआई पिछले साल के मुकाबले 7 फीसद ज्यादा हुई

– हमारे देश में इस बार खरीफ की फसल की बुआई पिछले साल के मुकाबले 7 फीसद ज्यादा हुई है। धान इस बार 10 फीसद, दालें 5 फीसद, मोटे अनाज लगभग 3 फीसद, ऑयलसीड लगभग 13 फीसद, कपास लगभग 3 फीसद बोए गए हैं। इसके लिए मैं देश के किसानों को बधाई देता हूं.

– बिहार के पश्चिमी चंपारण में सदियों से थारू आदिवासी समाज के लोग 60 घंटे के लॉकडाउन, उनके शब्दों में ‘60 घंटे के बरना’ का पालन करते हैं। प्रकृति की रक्षा के लिए बरना को थारू समाज के लोगों ने अपनी परंपरा का हिस्सा बना लिया है और ये सदियों से है.

हमारे पर्वो में पर्यावरण और प्रकृति के साथ सहजीवन का संदेश छिपा होता है

– हम बहुत बारीकी से अगर देखेंगे, तो एक बात अवश्य हमारे सामने आएगी- हमारे पर्व और पर्यावरण। इन दोनों के बीच एक बहुत गहरा नाता है। जहां एक ओर हमारे पर्वो में पर्यावरण और प्रकृति के साथ सहजीवन का संदेश छिपा होता है तो दूसरी ओर कई सारे पर्व प्रकॉति की रक्षा के लिए ही मनाए जाते हैं.

– आम तौर पर ये समय उत्सव का है। जगह-जगह मेले लगते हैं, धार्मिक पूजा-पाठ होते हैं। कोरोना के इस संकट काल में लोगों में उमंग और उत्साह तो है ही, मन को छू लेने वाला अनुशासन भी है। एक रूप में देखा जाए तो नागरिकों में दायित्व का एहसास भी है। लोग अपना और दूसरों का ध्यान रखते हुए रोजमर्रा के काम कर रहे हैं.

पाकिस्तान को बताया दुष्ट

पिछले महीने मन की बात का प्रसारण संयोग से कारगिल विजय दिवस की 21वीं सालगिरह के दिन हुआ था। इस अवसर पर मोदी ने पाकिस्तान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि दुष्ट का स्वभाव ही होता है, हर किसी से बिना वजह दुश्मनी करना। उसने अंदरूनी विवादों से ध्यान हटाने और भारत की जमीन हड़पने के लिए दुस्साहस किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत के मित्रता प्रस्तावों के जवाब में पाकिस्तान पीठ में छुरी घोंपने की कोशिश करता है।

कोरोना का खतरा अभी टला नहीं

इस दौरान पीएम ने जोर देकर कहा था कि देश में कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। हमें बहुत ही ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। चेहरे पर मास्क लगाना या गमछे का उपयोग करना, दो गज की दूरी, लगातार हाथ धोना, कहीं पर भी थूकना नहीं, साफ सफाई का पूरा ध्यान रखना यही हमारे हथियार हैं जो हमें कोरोना से बचा सकते हैं।