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जामताड़ा : जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई

  • एकमात्र रेफरल अस्पताल खंडहर में तब्दील
  • क्षेत्र के नेता और मंत्री अस्पताल पर नहीं दे रहे ध्यान

अनवर हुसैन

जामताड़ा। झारखंड राज्य अलग होने के बाद कई ऐसी चीजें बदलने की उम्मीद थी। लेकिन कोई बदलाव नही दिख रही है। लोगों को सबसे ज्यादा स्वास्थ्य के क्षेत्र में बदलाव होने की उम्मीदें थी। क्योंकि जामताड़ा जिला स्वास्थ्य के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है। लेकिन राज्य बनने के इतने दिनों बाद भी व्यवस्था में कोई बदलाव न होना कहीं न कहीं लोगों के मन मे एक क्षोभ है। लोग प्रकाश तो कर रहे हैं। लेकिन इसका विरोध नही करते है। इसका भी कई कारण देखा जा रहा है। लोगों ने कहा कि राज्य बनने के बाद स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली में सुधार की उम्मीद थी। लेकिन मंत्री, नेता को कहने के बाद भी हालात नही बदली।

जिले का एक मात्र रेफरल अस्पताल बंद

लोगों का कहना है कि जिले का एकमात्र रेफरल अस्पताल कुंडहित बंद है। करोड़ों ख़र्च कर बिल्डिंग बनी। सरकार ने करोड़ो की मशीन भेजी। आधुनिक सारी सुविधा को ध्यान में रख कर इतनी बड़ी बिल्डिंग बनी। लेकिन सरकार एवं विभाग की उपेक्षापूर्ण नीति के कारण अस्पताल आज खंडहर में तब्दील हो रहा है। लेकिन किसी भी नेता मंत्री सुध तक नही ले रहे हैं।

संयुक्त बिहार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ महाबीर प्रसाद ने किया था उद्घाटन

बता दें कि इस रेफरल अस्पताल का निर्माण तत्कालीन बिहार सरकार ने किया था। नाला विधान सभा क्षेत्र के कुंडहित प्रखंड में बनाया गया है। तत्कालीन बिहार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ महाबीर प्रसाद ने रेफरल अस्पताल का उद्घाटन किया था। अस्पताल के उद्घाटन के बाद से ही अस्पताल में रौनक देखने को मिलती थी। लेकिन धीरे धीरे राज्य अलग हुआ और अस्पताल की स्थिति भी बदतर होती गयी। राज्य गठन के बाद लोगों को उम्मीद थी कि इस अस्पताल का और भी हाईटेक होगा। लेकिन हाईटेक होने के बजाय अस्पताल खंडहर में तब्दील हो गया। कई सरकारें आई गई लेकिन इस रेफरल अस्पताल की सुध किसी सरकार ने नही ली।

जिले के कई प्रखंडों में नही है चिकित्सक

यह जानकर आश्चर्य होगा कि रेफरल अस्पताल तो दूर पीएचसी व सीएचसी में चिकित्सक नही है। चिकित्सक के अभाव में लोगों को बंगाल का शरण लेनी पड़ रही है। बता दें कि जिले का फतेहपुर प्रखंड में एक भी सरकारी चिकित्सक नही है। वहीं कुंडहित प्रखंड में एक ही डेंटिस्ट की पदस्थापना है, जो लोगों को कोई सुविधा नही मिल रहा है। फतेहपुर व कुंडहित प्रखंड के लगभग दो लाख की आबादी बंगाल पर शरण लेनी पड़ती है।

जिले का आठ लाख आबादी पर 32 चिकित्सक

वही जिले की आबादी लगभग आठ लाख है। लेकिन चिकित्सक के मामले में मात्र 32 चिकित्सक ही पदस्थापित हैं। जबकि जिले में 89 चिकित्सक का पद है। ऐसे में लोगों को क्या सुविधा मिलती होगी ये सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। जिले में एक भी सर्जन, विशेषज्ञ चिकित्सक नही है। जिला स्वास्थ्य के मामले में बिल्कुल ही पिछड़ा हुआ है। लेकिन किसी सरकार ने सुध तक लेना मुनासिब नही समझती है।

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