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खूंटी : महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के अंतर्गत तसर की खेती को मिल रहा बढ़ावा

  • तसर की खेती कर महिला किसान बन रहे आत्मनिर्भर

ब्रजेश कुमार

खूंँटी। जिले के रनिया प्रखण्ड अन्तर्गत तुबुकेल गांव में बेसिक सीड रियरिंग (BSR) खेती से तसर के बीज की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा हैे। जिसके लिए इस वर्ष जिले में 800 नये किसानों के साथ तसर की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है। जिले की महिला किसानों को खेती के साधनों से आत्मनिर्भर बनाने के लिए तसर की खेती को बढ़ावा देते हुए महिला किसान परियोजना के अंतर्गत खूंटी जिले में बेसिक सीड रियरिंग (BSR) की पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे महिलाओं को तसर की खेती हेतु रोग मुक्त कीट (डीएफएल) के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर ना होना पड़े इसका प्रयास किया जा रहा है।

इसी क्रम में रनिया के तुबुकेल गांव में BSR खेती का प्रथम जत्था तसर के बीज की खेती को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है। इस वर्ष जिले में 800 नये किसानों के साथ तसर की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है। महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के अंतर्गत तसर की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से DFL (डिजीज फ्री लेयिंग्स) भी उपलब्ध कराया गया है।

किसानों को DFL (डिजीज फ्री लेयिंग्स) उपलब्ध कराए गए हैं
इस तरह की खेती के लिए किसानों को DFL (डिजीज फ्री लेयिंग्स) उपलब्ध कराए गए हैं। इन अंडों के कीड़े एक साथ अंडकोष से बाहर निकलते हैं। तत्पश्चात् इन कीड़ों को आसन, अर्जुन (हथना) एवं साल वृक्षों पर पदस्थापित कर दिया जाता है। जिसके पत्तों के सेवन से ये अपने आकर और विकास को प्रगतिशील रखते हैं। इन्हें पूरी तरह विकसित होने में 30-35 दिनों का समय लगता है, जिसके बाद ये कीड़े कोकून बना लेते हैं। कोकून का भेष धारण करने के लिए ये कीड़े अपने लार के माध्यम से अंडाकार परत का निर्माण करते हैं तथा खुद उनके भीतर प्रवास करने लगते हैं। ये कोकून अंडा का आकार बनाने के 45 दिनों के पश्चात् रेशम निकालने के लिए तैयार हो जाते हैं। इन कोकून को उत्पादक समूहों के माध्यम से कोकून बैंक तक पहुँचाने का काम किया जाता है। इससे महिला किसान जुड़ कर स्वावलंबन की राह पर अग्रसर हो रहे हैं।

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