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देसी कोरोना वैक्सीन Covaxin पर गुड न्‍यूज, ट्रायल के अगले दौर में

  • भारत बायोटेक की बनाई वैक्‍सीन Covaxin को इंसानों पर दूसरे दौर के ट्रायल की अनुमति मिल चुकी है

भारत में कोविड-19 की वैक्‍सीन (Corona vaccine in India) का जोर-शोर से ट्रायल चल रहा है। भारत बायोटेक की बनाई वैक्‍सीन Covaxin को इंसानों पर दूसरे दौर के ट्रायल की अनुमति मिल चुकी है। एक बार एथिक्‍स कमिटी अप्रूवल दे दे, फिर फेज 2 ट्रायल शुरू हो जाएगा। सब्‍जेक्‍ट एक्‍सपर्ट कमिटी ने कहा है कि इस बार 380 लोगों पर ट्रायल होना चाहिए। ICMR-भारत बायोटेक ने इस वैक्‍सीन को जॉइंटली डेवलप किया है। यह एक ‘इनऐक्टिवेटेड’ वैक्‍सीन है यानी इसमें मार दिए गए वायरस का इस्‍तेमाल किया गया है ताकि डोज देने पर शरीर में उसके खिलाफ ऐंटीबॉडीज तैयार हो सकें। पहले फेज में यह वैक्‍सीन पूरी तरह सेफ पाई गई थी। देशभर में 375 लोगों पर इसका ट्रायल किया गया था।

कोरोना वैक्‍सीन के लिए मारा-मारी को देखते हुए खुफिया एजेंसियां भी इसमें इंवॉल्‍व हो गई हैं। न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स ने एक लेख में रूसी और चीनी हैकर्स की कोशिश का ब्‍ययोरा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के वैक्‍सीन रिसर्च नेटवर्क को टारगेट किया जबकि चीन ने जहां पर वैक्‍सीन का ट्रायल हुआ, उस यूनिवर्सिटी को हैक करने की कोशिश की। ईरान ने भी वैक्‍सीन डेटा चुराने की कोशिशें तेज कर दी हैं।

कोरोना के खिलाफ कोई वैक्‍सीन 50% भी प्रभावी नहीं: WHO

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोविड वैक्‍सीन को लेकर बड़ा बयान दिया है। इस ग्लोबल संस्‍था ने कहा कि हमारे मानदंडों के अनुसार, क्लिनिकल ट्रायल के एडवांस स्टेज में पहुंची कोई भी कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन 50 फीसदी प्रभावी भी नहीं है। WHO ने कहा कि हमें उम्मीद नहीं है कि अगले साल यानी 2021 तक भी दुनिया के सभी लोगों को वैक्सीन की खुराक मिल सकेगी.

आईसीएमआर के ‘इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ में एक संपादकीय के मुताबिक, “नए अध्ययन से पता चलता है कि दोबारा कोरोना का संक्रमण हो सकता है। इसमें कहा गया कि लंबे समय तक प्रतिरक्षा तंत्र के मौजूद नहीं रहने से टीका के कारगर सिद्ध होने पर भी असर पड़ेगा। टीका का असली असर तब पता चलेगा जब आगामी महीनों में अलग-अलग आबादी पर इसका इस्तेमाल होगा।

रूसी कोरोना वैक्‍सीन निकली ‘सेफ’

रूस ने पिछले महीने ‘स्‍पतनिक V’ कोविड वैक्‍सीन लॉन्‍च की थी। दुनियाभर के एक्‍सपर्ट्स ने बिना पर्याप्‍त ट्रायल वैक्‍सीन लॉन्‍च करने के लिए रूस की खासी आलोचना की थी। अब ‘द लैंसेट’ में छपी एक रिसर्च के अनुसार, यह वैक्‍सीन ‘सेफ’ पाई गई है। वैक्‍सीन का पार्टिसिपेंट्स पर कोई साइड इफेक्‍ट नहीं हुआ और वह शरीर में कोविड ऐंटीबॉडीज तैयार करने में भी सफल रही। वैक्‍सीन ने 28 दिन में टी-सेल्‍स की जेनरेट कीं।

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