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रतनलाल जैन भवन रांची में आयोजित ध्यान एवं सुरति समाधि शिविर का दूसरा दिन

आचार्यवरों की आध्यात्मिक अभिव्यक्तियों से अभिभूत रहे साधकगण

रांची। आज 09 अगस्त को अपने निर्धारित समय से योग कक्षाएं शुरू हो गई। आचार्य प्रभाकर जी,आचार्य दर्शन जी,आचार्य ज्ञानामृत जी , आचार्य शिवानंद जी एवं आचार्य अमरेश जी ने आनंद प्रज्ञा के सत्र में सभी साधकों को जीवन की वास्तविकताओं से सहज शब्दों द्वारा परिचय कराया। प्रज्ञा सूत्रों पर झूमते साधकों ने दुर्लभ आनंद अनुभव किया।
आचार्य दर्शन जी ने सम्यक वाणी एवं सम्यक सम्बन्ध की विवेचना करते हुए प्रसंगवश व्यक्तित्व , आत्मा एवं परमात्मा के तल पर जीने की स्थिति को स्पष्ट करते हुए अहंकार की पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया।आचार्य प्रभाकर जी ने धारणा , ध्यान एवं समाधि का विष्लेषण करते हुए एकाग्रता तथा जागृति पर बहुमूल्य विचार दिए। आचार्य अमरेश जी ने कहा कि मानव में परमात्मा की प्यास जन्मोजन्म के पुण्यफल का प्रतीक है और भाग्यशाली को ही उपलब्ध होता है। क्रमशः आचार्य ज्ञानामृत जी एवं आचार्य शिवानंद जी ने भी अपने दिव्य संदेशों से ध्यान सभा को आलोकित किया।इस अवसर पर मुख्य रूप से सर्व स्वामी अरविंद , चंद्रकांत पंडित , राज़ रामगढी , भूषण जी , प्रह्लाद , यु.पी.सिंह , गौतम जितेन्द्र राणा , मां संध्या , गुड़िया , पूजा , आरोही , गरिमा , अरुणा , श्रुति सहित अन्य कई ओशो साधकगण उपस्थित थे।

 

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