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स्वीकारें वैसा,जैसा मिला,हैं व्यर्थ ही रखना कोई गिला,उम्मीद अमर है दुनिया में,किन्तु किसी से नहीं रखना भला

रतनलाल जैन भवन रांची में , ध्यान एवं सुरति समाधि शिविर का तीसरा दिन

रांचीआज 10 अगस्त को सुरति एवं ध्यान समाधि के पहले सत्र में आचार्य शिवानंद जी एवं आचार्य अजय जी ने अपनी विशिष्ट भूमिकाओं से साधकों को आह्लादित किया। अगले सत्र में आचार्य अमरेश जी ने संकल्प की स्थिति , उत्पति एवं परिणति को विशेष रूप से परिभाषित किया। आचार्य ज्ञानामृत जी ने कहा कि आनंद में रहना हमारा स्वभाव है। सभी दुख की अपेक्षा खुशी चाहते हैं। यह भी विचारणीय है कि प्रेम , दया , उदारता , करुणा आदि ऊंचे भाव हैं , किसी के प्रति रखें जाएं तो केवल देने का भाव हो , अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने योग पंचव्रत को स्पष्ट करते हुए अहिंसा , अव्यसन , शाकाहार , साधना एवं अप्रसार की विषयवस्तु पर भी बहुमूल्य विचार दिए।
इस अवसर पर मुख्य रूप से सर्व स्वामी यु पी सिंह , भूषण जी , अरविंद , चंद्रकांत पंडित , प्रह्लाद , गौतम , दीपेंद्र , अशोक गुप्ता , अयोध्या प्रसाद , जितेन्द्र राणा , अजय रजक , मां मीना , मां सृष्टि , रानी , संध्या , गुड़िया , पूजा , आरोही , गरिमा , अरुणा , श्रुति सहित कई अन्य ओशो साधकगण उपस्थित थे। इस बात की जानकारी ओशोधारा झारखंड के स्टेट प्रेस मीडिया कोआर्डिनेटर स्वामी राज़ रामगढी ने दी है।

 

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