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“ओंकार” का दिव्य नाद , जीवन बने धन्य – आबाद,पहला गौरव ब्रह्म-ज्ञान का , दूजा परमानंद का स्वाद

12 अगस्त को समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी साधकों को ओंकार दीक्षा प्रदान करेंगे

रांची के रतनलाल जैन भवन में आयोजित छह दिवसीय ध्यान एवं सुरति समाधि शिविर का चौथा दिन

रांचीओशोधारा मैत्री संघ , रांची द्वारा आयोजित ध्यान एवं सुरति समाधि के चौथे दिन 11 अगस्त को कार्यक्रम स्थल पर प्रातः काल से ही कार्यकर्ताओं एवं साधकों में अनूठे उत्साह , उमंग और उल्लास की लहरें व्याप्त थी। आचार्यगण भी भाव-विभोर थे कि आज समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी का शुभागमन झारखंड की प्रसिद्ध नगरी रांची में होना है। कल समर्थगुरु सभी ओशो साधकगणों का साक्षात्कार इस सृष्टि की दिव्यतम ध्वनि “नाद ब्रह्म” अर्थात “ओंकार” से कराएंगे।
निर्धारित समय पर आचार्य अमरेश जी के नेतृत्व में आचार्य ए.के.सिंह , स्वामी यु.पी.सिंह , स्वामी दीपेंद्र , स्वामी अरुण बगड़िया , मां मीना बगडिया , स्वामी अनुज झा , स्वामी मनोज गुप्ता , वाई ई अशोक कुमार गुप्ता व अन्य समर्थगुरु सिद्धार्थ जी की अगवानी एवं आदर सहित निवास तक पहुंचाने के लिए रांची हवाई अड्डे पर पहुंचे। सभी शिष्टाचारों के पश्चात टीम आयोजन स्थल पर लौट आई।


इधर सभी सत्रों में आचार्यों द्वारा ध्यान कक्षाएं नियम-सारणी के अनुसार निर्बाध चलती रहीं। वरिष्ठतम आचार्य प्रभाकर जी ने अपने सत्र में पांचों ज्ञानेंद्रियों , पांचों कर्मेंद्रियों तथा आठो चक्रों की सहज , सुंदर एवं सार्थक व्याख्या से सभी साधकों को आध्यात्मिक वैभव का अनुपम आभास कराया।
अवसर पर मुख्य रूप से आचार्य शिवानंद जी , आचार्य ज्ञानामृत जी , आचार्य दर्शन जी , सर्व स्वामी भूषण , अरविंद , चंद्रकांत पंडित , प्रह्लाद , गौतम , अशोक गुप्ता , अयोध्या प्रसाद , जितेन्द्र राणा , अजय रजक , बीगन कपरदार , मां मीना , मां सृष्टि , आरोही , सरिता सिन्हा , पूजा , अरुणा , श्रुति , प्रिया सहित कई अन्य ओशो साधकगण उपस्थित थे। इस बात की जानकारी ओशोधारा झारखंड के स्टेट प्रेस मीडिया कोआर्डिनेटर स्वामी राज़ रामगढी ने दी है।

 

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