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ध्यान एवं सुरति समाधि रुपी ज्ञानयज्ञ का सुमधुर समापन

साधकों ने समापन के पूर्व आचार्यों के समक्ष अपने ध्यान सत्र की अनुभूतियां साझा की

रांचीशहर के रातू रोड स्थित रतनलाल जैन भवन में ओशोधारा मैत्री संघ द्वारा आयोजित छह दिवसीय ध्यान एवं सुरति समाधि शिविर का आज अपराह्न 01:00 बजे अत्यंत संवेदनामयी वातावरण में समापन सम्पन्न हुआ। आज के प्रातः कालीन सत्र में क्रमशः वरिष्ठ आचार्य द्वय प्रभाकर जी एवं ज्ञानामृत जी ने सुमिरन योग की प्रायोगिक विधियों का पुनरावलोकन तथा पुनराभ्यास कराया। इसके पश्चात फीडबैक के सत्र में एक – एक करके सभी प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। एक तथ्य जो सर्वाधिक रुप से सामने आया कि आध्यात्मिकता के इस रुप-रस से नव साधकगण न केवल अभिभूत थे , अपितु अनभिज्ञ भी थे। किसी – किसी साधक ने तो यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है , जैसे मेरा यह नया जन्म हुआ है।
सभा को क्रमशः आयोजन की मुख्य भूमिका में रहे आचार्य अमरेश जी , आचार्य प्रभाकर जी , आचार्य ज्ञानामृत जी , आचार्य ए के सिंह जी , आचार्य दूबे जी एवं अन्य ने भी संबोधित किया। यु पी सिंह , स्वामी भूषण जी , स्वामी अरविंद , स्वामी चंद्रकांत पंडित , स्वामी प्रह्लाद , मां मीना एवं मां सृष्टि के आयोजन की सफलता में योगदान के लिए आचार्य अमरेश जी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। अवसर पर स्वामी दीपेंद्र , गौतम , अयोध्या प्रसाद , अंगिता देवी , बीगन कपरदार , आरोही , सरिता सिन्हा , पूजा , अरुणा , श्रुति , प्रिया सहित कई अन्य ओशो साधकगण उपस्थित थे। आभार ज्ञापन ओशोधारा झारखंड के स्टेट प्रेस मीडिया कोआर्डिनेटर स्वामी राज़ रामगढी ने किया।

 

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