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साहिबगंज में हिंदी दिवस के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन

  • हिंदी और हिंदुस्तान विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन

साहिबगंज : हिंदी दिवस पर सोमवार को एनएसएस के तत्वाधान में “हिंदी और हिंदुस्तान”विषय पर जूम एप बेविनार के माध्यम से विमर्श गोष्ठी का आयोजन किया गया। बेविनार में साहिबगंज महाविद्यालय,बीएसके कॉलेज बरहरवा,शिबू सोरेन जनजातीय कॉलेज,बोरियो से शिक्षक,छात्र व अन्य राज्य से हिंदी के विद्वानजन व साहित्य प्रेमी जुड़े।कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि साहिबगंज महाविद्यालय प्राचार्य डॉ विनोद कुमार शामिल हुए।वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएसके कॉलेज के प्राचार्य डॉ सुधीर कुमार सिंह ने की।संचालन एनएसएस नोडल पदाधिकारी डॉ रणजीत कुमार सिंह ने किया।एनएसएस वालंटियर्स दीपांजलि कुमारी ने कहा कि हिन्दी से पहचान हिन्दूस्तान की है।

हिन्दी से ही पहचान हमारे समाज की है

हिन्दी से ही पहचान हमारे समाज की है। बिन हिन्द हमारी पहचान अधूरी है। इसलिए विदेशों में भी हिंदी को सम्मान दिलाना है।शिक्षिका रेणु गुप्ता ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने कहा था कि”अंग्रेजी पढ़ के यद्यपि सब गुण होत प्रवीण,पर निज भाषा ज्ञान बिन रहत हैं के हीन”।भाषा केवल संवाद की भाषा नही होती बल्कि उसमे एक जीवित समाज सांस ले रहा होता है।हिंदी बहुत ही ताकतवर, स्नेहिल और ज्ञानवान भाषा है। डॉ ध्रुव ज्योति कुमार सिंह ने कहा कि जन जन में लोकप्रिय होने की वजह इसकी सरलता,सहजता और सरसता है।डॉ चंदन कुमार बोहरा ने कहा कि हिंदी को हमेशा प्राथमिकता दें।हिंदी है और हिंदी ही हिंदुस्तान है।ज्योति कुमारी ने हिंदी को बचाओ स्वरचित कविता के माध्यम से बड़ा संदेश दिया।बक्सर बिहार से नवनीत कुमार सिंह ने कहा कि हिंदी पूरे देश की है।हिंदी एकवचन नहीं,हिंदी भाषा विविधता से भरी हुई है।हिंदी भाषा में उतनी ही विविधता है,जितना की इस देश की विविधता में है।हिंदी और हिंदुस्तान एक दुसरे के पूरक हैं।
वही डॉ रणजीत कुमार सिंह ने कहा कि हिंदी भाषा अनेकता में एकता को स्थापित करने की सूत्रधार हैं।भारत विविधताओं का देश है।यहां अनेक भाषाएं बोली जाती है।जब उत्तर भारत दक्षिणी भारत पूर्वी और पश्चिमी भारत के तमाम क्षेत्रों में जाएंगे तो आपको वहां की अलग-अलग भाषाओं से रूबरू होने का मौका मिलेगा। ऐसी स्थिति में हिंदी ही आपको तमाम क्षेत्रों और लोगों से जोड़ेगी।कोई भी हिंदुस्तानी जहां भी हो दूसरे हिंदुस्तानी से हिंदी में अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं।अपने दिल और मन की बात अगर किसी भाषा में सहजता से की जा सकती है तो वह हिंदी ही है।

राष्ट्रीय अस्मिता और गौरव का प्रतीक है

हिंदी केवल हमारी मातृभाषा व राष्ट्रभाषा ही नहीं।अपितु राष्ट्रीय अस्मिता और गौरव का प्रतीक है।राष्ट्रभाषा हिंदी हमें भावनात्मक एकता के सूत्र में बांधती है।आज विश्व में हिंदी बोलने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।इसी हिंदी के सम्मान में हर वर्ष 14 सितंबर को देश में हिंदी दिवस मनाया जाता है। आजादी मिलने के 2 साल बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में एकमत से हिंदी को राजभाषा घोषित किया गया था।राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिंदी को जनमानस की भाषा कहा था। इंटरनेट पर हिंदी का प्रसार तेजी से हो रहा है।डिजिटल माध्यम से 2016 में हिंदी समाचार पढ़ने वालों की संख्या 5 पॉइंट 5 करोड़ जो 2021 में बढ़कर जो 2021 में बढ़कर 14 करोड़ होने का अनुमान है।

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