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ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ को पेश किया गया ख़िराज़ ए अक़ीदत

वेस्ट बोकारो (रामगढ)। हर साल की तरह इस साल भी लईयो जामा मस्जिद में इल्म की रौशनी ट्रस्ट के ज़ेरे एहतमाम मनाया गया उर्स ए ख़्वाजा ग़रीब नवाज़। महफ़िल की सदारत मौलाना आशिक़ रज़वी साहब और संचालन शमीम अहमद अशरफ़ी ने किया। ग़रीब नवाज़ के शान में नात व मनक़बत पेश किए गए। बाद प्रोग्राम लगंर भी बांटा गया। ट्रस्ट के सचिव मुहम्मद वसीम कौसर रज़वी ने बताया कि जुमला आशिक़ाने ग़ौस व ख़्वाजा व रज़ा को ये जान कर बेहद ख़ुशी होगी कि हम ऐसे मज़हब से वाबस्ता हैं। जिस में अल्लाह तआ़ला के नेक बन्दे और पैगंबर ए इस्लाम के परहेज़गार उम्मती मौजूद हैं और हमारे हिन्दूसतान में अल्लाह पाक के एक ऐसे वली जलवा गर हैं।जिन के फ़ैज़ान से हर किसी को फ़ायदा पहुंच रहा है। जिन को हम ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के नाम से जानते हैं। उनका नाम मुईनुद्दीन हसन चिश्ती है। उनका जन्म 530 हिजरी इलाक़ा सन्जर सियसतान में हुआ। और 6 रजब 627 हिजरी अजमेर शरीफ़ में उनका विसाल हुआ, और वहीं पर मदफ़न किया गया। हमारे प्यारे ख़्वाजा का दरबार ऐसा है जहां दुर व दराज़ के लोग ज़ियारत के लिए आते हैं। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्म के लोग उनके दरबार में अपनी अपनी मुरादें ले कर आते हैं और मुरादें पूरी कर के जाते हैं। आठ सौ ग्यारह साल गुज़र गए। लेकिन आज भी ग़रीब नवाज़ का फ़ैज़ान हम गुलामों पर जारी है और अल्लाह के करम से क़यामत तक जारी रहेगा। ये भी बताया गया कि आज जो हिन्दूसतान, पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, बंग्लादेश और इससे बने जितने भी देश हैं वहाँ पर सबसे पहले इस्लाम के पैग़ाम को पहूँचाने वाले शख़्सियत का नाम ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ है। जितने ऐहसान गरीब़ नवाज़ का हमारे ऊपर हैं हम उनका बदला चुका नहीं सकते फिर भी हम उनके बारगाह में हर साल 6 रजब को फ़ातिहा दिलाते हैं और अपनी ग़ुलामी का सुबूत पेश करते हैं। मौक़े पर लईयो अन्जुमन के सदर ग़ुलाम क़ादीर, सिक्रेट्री वजाहत हुसैन, हाजी मक़सूद, हाजी शहादत, जमरुद्दीन अन्सारी, अबूल अन्सारी, शमीम अन्सारी, शरफ़ुद्दीन रज़वी, शोएब अन्सारी, बदरुद्दीन अन्सारी, नज़रुल अन्सारी, आमिल हसन, हयात अन्सारी, कामिल हसन, शाहीद रज़ा, हाशिम आमला, अफ़ताब आलम व दीगर गांव वाले मौजूद थे।

 

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