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संसद से पारित हुए किसान विरोधी कानून का कांग्रेस करेगी विरोध

  • प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में प्रेस कॉन्फ्रेंस का हुआ आयोजन
  • प्रदेश कार्यालय में अध्यक्ष एवं सीएलपी लीडर ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस
  • काला कानून से पूंजीपतियों का भला होगा, खेत, खलिहान,किसान विरान होंगे: डॉ रामेश्वर

रांची/रामगढ़। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव में केंद्र के मोदी सरकार द्वारा संसद से पारित किए गए किसान विरोधी कानून का विरोध करने का निर्णय लिया है। इस बिल का विरोध करते हुए कांग्रेस ने 26 सितंबर को प्रदेश के सभी जिला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लोगों को जानकारी दी। कांग्रेस प्रदेश कार्यालय रांची में प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव एवं सीएलपी लीडर आलमगीर आलम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। वही रामगढ़ एवं हजारीबाग में कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डॉ राजेश गुप्ता एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता निरंजन पासवान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि मोदी सरकार ने तीन काले कानूनों जिनमें कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य कानून,कृषि कीमत आश्वासन कानून एवं कृषि सेवा पर करार कानून के माध्यम से किसान, खेत,मजदूर,छोटे दुकानदार, मंडी ,मजदूर एवं कर्मचारियों की आजीविका पर एक क्रूर हमला बोला है। यह किसान, खेत और खलिहान के खिलाफ एक घिनौना षड्यंत्र है। केंद्रीय की भाजपा सरकार तीन काले कानूनों के माध्यम से देश की हरित क्रांति को हराने की साजिश कर रही है। देश के अन्नदाता एवं भाग्य विधाता किसान तथा खेत मजदूर की मेहनत को चंद पूंजीपतियों के हाथों गिरवी रखने का षड्यंत्र किया जा रहा है। आज देश भर में 62 करोड़ किसान मजदूर एवं 250 से अधिक किसान संगठन इन काले कानूनों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उनके सरकार सब एतराज दरकिनार कर देश को बरगलाने का काम कर रहे हैं।

सड़कों पर किसान मजदूरों को लाठियों से पिटवाया जा रहा है

अन्नदाता किसान की बात सुनना तो दूर संसद में उनके नुमाइंदों की आवाज को दबाया जा रहा है। सड़कों पर किसान मजदूरों को लाठियों से पिटवाया जा रहा है।प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने कहा कि अगर अनाज मंडी सब्जी मंडी व्यवस्था पूरी तरह से खत्म हो जाएगी तो कृषि उपज खरीद प्रणाली भी पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। ऐसे में किसानों को ना तो न्यूनतम समर्थन मूल्य, कैसे मिलेगा कहां मिलेगा और कौन देगा। क्या एफसीआई 15 करोड़ किसानों के खेत से एमएसपी पर उनकी फसल की खरीद कर सकती है। अगर बड़ी-बड़ी कंपनियों द्वारा किसान की फसल को एमएसपी पर खरीदने की गारंटी कौन देगा। एमएसपी पर फसल ना खरीदने की सजा क्या होगी। मोदी जी इनमें से किसी बात का जवाब नहीं दे रहे हैं।

इसका सबसे बड़ा फायदा मुट्ठी भर पूंजीपतियों को होगा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि इसका जीता जागता उदाहरण भाजपा शासित बिहार है। वर्ष 2006 मैं एपीएमसी एक्ट, यानि अनाज मंडियों को खत्म कर दिया गया। आज बिहार के किसान की हालत बद से बदतर है। किसान की फसल को दलाल औने पौने दामों पर खरीद कर दूसरे प्रांतों की मंडियों में मुनाफा करा एमएसपी पर बेच देते हैं। अगर पूरे देश की कृषि उपज मंडी व्यवस्था खत्म हो गई तो इससे सबसे ज्यादा नुकसान किसान खेत मजदूर को होगा। इसका सबसे बड़ा फायदा मुट्ठी भर पूंजीपतियों को होगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि मोदी सरकार का दावा है कि अब किसान अपनी फसल देश में कहीं भी बेच सकते हैं। यह पूरी तरह से सफेद झूठ है।आज भी किसान अपनी फसल किसी भी प्रांत में ले जाकर बेच सकता है। परंतु वास्तविक सत्य क्या है। कृषि सेंसस 2015-16 के मुताबिक देश का 86% किसान 5 एकड़ से कम भूमि का मालिक है। जमीन की औसत मिल्कियत 2 एकड़ या उससे कम है। ऐसे में 86% किसान अपनी उपज नजदीक अनाज सब्जी मंडी के अलावा कहीं और ट्रांसपोर्ट कर ना ले जा सकता है या बेच सकता है। मंडी प्रणाली नष्ट होते ही सीधा प्रहार स्वाभाविक तौर से किसान पर होगा। मंडिया खत्म होते ही अनाज सब्जी मंडी में काम करने वाले लाखों-करोड़ों मजदूरों, ट्रांसपोर्टरों आदि की रोजी रोटी और आजीविका अपने आप खत्म हो जाएगी। अनाज सब्जी मंडी व्यवस्था खत्म होने के साथ ही प्रांतों की आई भी खत्म हो जाएगी।

अध्यादेश के माध्यम से किसान को ठेका प्रथा में फंसा कर उसे अपने ही जमीन में मजदूर बना दिया जाएगा। कृषि उत्पाद खाने की चीजों एवं फल फूल सब्जियों की स्टॉक लिमिट को पूरी तरह से हटाकर आखिरकार न किसान को फायदा होगा और ना ही उपभोक्ता को। जब स्टॉक की सीमा ही खत्म हो जाएगी तो जमाखोरों और कालाबाजारीयों को उपभोक्ता को लूटने की पूरी आजादी होगी।

28 को रांची में पदयात्रा और राज्यपाल को सौंपा जाएगा ज्ञापन

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राजेश गुप्ता ने कहा कि 26 जनवरी को स्पीक अप इंडिया के माध्यम से विरोध प्रदर्शन किया गया। ऑनलाइन फेसबुक के माध्यम से झारखंड के लाखों से अधिक किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता इस से जुड़ कर विचार सुने। श्री गुप्ता ने कहा कि 28 सितंबर को प्रदेश मुख्यालय कांग्रेस भवन रांची से पूर्वाहन 11:30 बजे से महात्मा गांधी के प्रतिमा मोरहाबादी से एक पद यात्रा आरंभ कर राज्यपाल महोदया को समर्पित किया जाएगा। वही 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी के जयंती के अवसर पर पार्टी ने किसान मजदूर बचाओ दिवस मनाने का निर्णय लिया है। जिसके तहत जिला मुख्यालय विधानसभा मुख्यालय अनुमंडल मुख्यालय पर जिला कांग्रेस प्रखंड कांग्रेस द्वारा धरना एवं पदयात्रा कार्यक्रम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 10 अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। वही 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक हस्ताक्षर अभियान राज्य के पंचायत प्रखंड एवं सभी क्षेत्रों में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए विधेयक के विरोध में हस्ताक्षर अभियान चलाकर किया जाएगा। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को देश के किसानों के हित में हम दिवस करेंगे। ताकि यह काला कानून वापस लिया जाए। रामगढ़ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मुन्ना पासवान,बलजीत सिंह बेदी,शांतनु मिश्रा, बैजू राय, राजकुमार यादव, मिथिलेश गुप्ता, राजेंद्र प्रसाद महतो राजू, लाल बिहारी महतो, के नायक सहित अन्य मौजूद थे।

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